सेलु/अभय बेदमोहता
रक्षाबंधन, भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार, इस बार ‘माहेर – शांति निवास’ में एक अनोखी मिसाल पेश कर गया। एक तरफ जहां देश भर में यह त्योहार घरों में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, वहीं ‘शांति निवास’, अनाथ, बेसहारा और मानसिक रूप से विक्षिप्त बुजुर्गों का यह आसरा, भावुकता और स्नेह का केंद्र बन गया था।इस वर्ष ‘शांति निवास’ ने इन लाचार लोगों के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, जिसका उद्देश्य केवल राखी बांधना नहीं, बल्कि उन्हें यह अहसास दिलाना था कि वे अकेले नहीं हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन समाज में प्रेम और करुणा का संदेश देने के लिए किया गया था।यहां की तस्वीरें बयां करती हैं कि किस तरह से संस्था के स्वयंसेवकों ने बुजुर्गों और अनाथों के बीच राखी बांधी। यह दृश्य केवल धागों का बंधन नहीं था, बल्कि जीवन में नई उम्मीदों की एक किरण थी। कई बुजुर्गों के चेहरे पर बरसों बाद खुशी की ऐसी लहर देखी गई, जिसने उनकी आँखों को छलकने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य व्यक्तियों द्वारा बुजुर्गों और संस्था के निवासियों को ‘शॉल’ देकर सम्मानित किया गया। यह एक छोटा सा इशारा था, लेकिन इन लोगों के लिए, जिन्होंने अपना घर और परिवार खो दिया है, यह सम्मान उनके लिये एक बड़े उपहार से कम नहीं था।
उसे समयसभी के चेहरों पर एक अनोखा अपनापन और एकजुटता दिखाई दी। इस त्योहार ने इन अजनबियों के बीच एक ऐसा रिश्ता बनाया, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।शांति निवास’ के इस कार्यक्रम ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिया है। त्योहारों का असली अर्थ केवल व्यक्तिगत आनंद नहीं, बल्कि समाज के वंचित और उपेक्षित वर्गों तक खुशियां पहुँचाना भी है। यह पहल हमें याद दिलाती है कि करुणा और संवेदनशीलता एक बेहतर समाज की नींव हैं।माहेर – शांति निवास’ हमेशा से ही निराश्रित लोगों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयासरत रहा है। इस रक्षाबंधन का कार्यक्रम इसी उद्देश्य की दिशा में उठाया गया एक और महत्वपूर्ण कदम था, जिसने साबित कर दिया कि प्रेम और देखभाल की शक्ति से जीवन को बदला जा सकता है।


